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How To Keep The Mind Clam / मन को शांत कैसे रखे |

अगर आपका मन अशांत रहता है अलग अलग विचार आते  है तो  आइए मै आज आप को ऐसी कहानी सुनाता हु जिसे सुनकर आपका मन शांत हो जाएगा |  एक समय की बात है...

अगर आपका मन अशांत रहता है अलग अलग विचार आते  है तो  आइए मै आज आप को ऐसी कहानी सुनाता हु जिसे सुनकर आपका मन शांत हो जाएगा | 

एक समय की बात है चाइना मै एक राजा रहता था | 
 उनका मन भी बहुत अशांत रहता था | उनको हर समय अजीब ओ  गरीब विचार  आता रहता था | वह इन सब से हमेशा बहुत परेशान रहते थे | वह हमेशा ये आश लगाए रहते थे की कोई दक्षिण भारत से आए और की इस समस्या का समाधान करे  | दिन पर दिन उन की उम्र बढ़ती जा रही थी | और दिन बीतते जा रहे थे  | फिर एक दिन जब राजा घूमने निकले तो उन्होने देखा की  कोई बड़ी पहाड़ी जो बर्फ   से  घिरी थी  |
उधर से एक बौद्ध संत आ रहे थे | जब राजा ने उन को देखा तो राजा से  रहा नहीं गया और वो संत के पास गए और उनके बारे में पूछा फिर बातचीत करते - करते  राजा ने उनको अपनी समस्या बताई | की उनका मन बहुत अशांत रहता है |  तो इस मन को शांत करने का  उपाय बताये |  तब बौद्ध संत न बोला की  तुम्हारा मन दो मुझे मे अभी उस को शांत कर देता हु | तब राजा को लगा की कही या संत पागल तो नहीं है आखिर कोई मन कैसे किसी को दे सकता है | तब संत ने  बोला ऐसा करो कल सुबह ४:०० बजे आना और साथ मे अपने मन को लाना तब में तुम्हरे मन को शांत कर  दूंगा |

 इतना कह कर संत पास के गुफा मे  जाकर ध्यान में बैठ गए  | और राजा वहा सा चला गया | महल मे  जा कर  राजा ने  पहले सोचा   की वह नहीं जाएगा  पर उसको मन को शांत  करने  का कोई उपाय नहीं मिल रहा था | तो वह दूसरे दिन ४ :०० बजे संत के पास गए तब संत न पूछा की तुम अपना मन साथ ले  के आए हो तब राजा  ने मना कर दिया | तब संत न बोला की अच्छा अभी तुम जाओ और कल मन को  साथ लेके आना | फिर राजा वहा से चला गया और दूसरे दिन फिर गया | तब उसने देखा की संत ध्यान में  बैठे थे राजा के पहुँचते संत न फिर पूछा की  आज अपना मन साथ लाए हो तब राजा ने फिर माना कर  दिया  | तब संत ने बोला की  एक काम करो तुम यहाँ ध्यान में बैठो फिर अपने  मन को ढूंढो जब मिलजाए तो बताना | तब में तुम्हरे मन को शांत कर  दूंगा  | तब राजा वहा ध्यान मे बैठ गया  कुछ घंटे बीते | तब संत न फिर से  पूछा की बातो तुम्हरा मन मिला | तब राजा ने मना कर  दिया | ऐसा कुछ दिनों तक चला राजा ४:०० बजे आता और ध्यान में बैठ जाता | धीरे - धीरे उसका मन शांत होने लगा | तब एक बार फिर संत ने पूछा  तुम्हरा मन मिला क्या | तब राजा ने बोला मन तो नहीं मिला पर शांति जर्रूर मिल गयी | राजा ने संत से  कहा जब तक मेने अपने मन को नहीं ढूंढा तब तक मेरा मन अशांत था | पर जब मेने अपने मन को ढूढ़ने का प्रयास करा तो मेरा मन शांत  हो गया | 
दोस्तों यही परेशानी कही न कही हमारे साथ भी होती है | हम भविष्य के  बारे मै सोचते रहते है |लकिन हम अपने  विचार को नियंत्रित कर ले  तो  अपने मन को भी  नियंत्रित  कर लेंगे | श्री कृष्णा ने भी कहा है मन सा बड़ा मित्र और मन सा बड़ा शत्रु  कोई नहीं तो इस मन के दास मत बनिया इस मन को अपना दास बनाइए | और जभी भी आपका मन अशांत हो तो बैठ के  ध्यान करिए और जो विचार आता है उन्हे आने दीजिए कोई भी विचार अस्थयी रूप से  नहीं रहता | और प्रतिदिन ध्यान करिए इस से आपके अशांत मन को शांति जर्रूर मिलेगी | 




दोस्तों हमने जिन बोध संत की बात की वो और कोई नहीं  बोधिधर्म है | इन के  बारे  मे आप सब जानते ही  होंगे | 

तो दोस्तों अगर आप को या कहानी अच्छी लगी तो कमेंट मे  जर्रूर  बताए | 










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